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शनिवार, अगस्त 06, 2022

बैंकिंग में ऑनलाइन फ्रॉडिंग से बचने के लिए जागरूकता एकमात्र साधन

ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा की जरूरत ज्यादा, मीडिया की भूमिका अहम

 बृजेन्द्र कुमार वर्मा

(लेखक- ग्रामीण विकास संचार अध्ययनकर्ता हैं)

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जैसे-जैसे ऑनलाइन लेन-देन बढ़ता जा रहा है, उसी के साथ ऑनलाइन खतरे भी बढ़ते जा रहे हैं। भारत में डिजिटलीकरण का विकास सूचना और संचार प्रौद्योगिकी तकनीकी पर आधारित है। लेन-देन को आसान बनाने के लिए इस पर अधिक जोर दिया जाने लगा। कोविड-19 के बाद से भारतीय तेजी से ऑनलाइन लेन-देन की ओर मुड़ने लगे। भारत सरकार डिजिटल इंडिया प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और ई मार्केटप्लेस जैसी व्यवस्था की ओर आकर्षण का उद्देश्य समाज को सशक्त बनाने और अर्थव्यवस्था को डिजीटल की ओर मोड़ने का प्रयास है। लेकिन अच्छे के साथ, बुरा भी साथ चलता है। जागरूकता की कमी होने से और बैंकों में जमा रूपयों के प्रति डर दिखाकर डिजीटल फ्रॉडिंग आम बात होती जा रही है, जिसके लिए तकनीकी व्यवस्था लानी अनिवार्य हो गयी है। वित्तीय समावेशन भारत में सामाजिक सुरक्षा तंत्र के केंद्र में है। वित्तीय समावेशन के साथ ही वित्तीय प्रौद्योगिकी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी का विस्तार हो रहा है। फिनटेक ने भुगतान और लेनदेन के विभिन्न प्रकार के नए विकल्प मुहैया कराए हैं। उदाहरण स्वरूप भीम यूपीआई से भारतीयों का जुड़ाव बढ़ा है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम के अनुसार मार्च 2022 तक यूपीआई के माध्यम से 88.8 खरब रुपए के 5.04 अरब लेनदेन हुए हैं। पिछले साल आधार समर्थित भुगतान प्रणाली के उपयोग से 20 अरब से ज्यादा लेनदेन किए गए।

कुछ कंपनियां भी भारत में ऐसी संचालित हैं, जो ऑनलाइन ही ऋण प्रदान कर रही हैं। पहले के समय में आपको ऋण लेने के लिए बहुत से कागजी कार्यवाही करनी होती थी, कंपनियों के ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते थे। ऑनलाइन बैंकिंग और लेन-देन ने इस व्यवस्था को आसान बना दिया है। साथ ही कुछ धोखेबाज कंपनियां भी चल रही हैं, जो जनता को ठगने का काम करती हैं। वे जनता को फोन करती हैं, ओर उनके खातों की जानकारी देकर धोखे से भरा एस0एम0एस0 भेज कर केवाईसी के नाम पर अथवा सतर्कता का हवाला देकर ओटीपी देने को कहती हैं, जैसे ही उन्हें ओटीपी मिलता है, उनके बैंक खातों से पैसे चले जाते हैं। सरकार को इसके लिए भी विभाग बनाना चाहिए, जो यह आसानी से पता लगा सके कि फोन कहां से आया है और ठगी का पैसा किसके बैंक खाते में गया है। तभी धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।

भारत सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा को और आसान बनाना होगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2017 में प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान को मंजूरी दी। इस अभियान का उद्देश्य 6 करोड़ ग्रामीण परिवारों तक पहुंचकर गांवों में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देना है। यह विश्व का सबसे बड़ा डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार लगभग 5 करोड व्यक्तियों जोड़ा जा चुका है और लगभग 4.90 करोड़ को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अभी यह संख्या बहुत कम है। भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रही है, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 80 करोड़ है। ऐसे में जागरूकता अभियान जारी रहना चाहिए और लगातार ग्रामीणों को जागरूक करते रहना होगा, नहीं तो ऑनलाइन फ्रॉडिंग होती ही रहेगी, अपितु इनकी संख्या बढ़ती रहेगी।

यहां मीडिया का जिक्र करना भी आवश्यक है, क्योंकि ऑनलाइन फ्रॉडिंग के खिलाफ अभियान मीडिया ही सफल कर सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी देखी गयी है। ऐसे में दृश्य-श्रव्य संचार माध्यमों के उपयोग से ही जनता को जागरूक किया जा सकता है। ग्रामीण जनता को यह भरोसा दिलाना आवश्यक है कि उनका पैसा पूर्ण रूप से सुरक्षित है और बैंक बिना कारण कोई ओ0टी0पी0 नहीं भेजती। जब ग्राहक स्वयं अपने बैंक से लेन-देन करता है, तभी ओ0टी0पी0 आता है, वह भी मात्र 5 मिनट के लिए, अन्यथा बैंक बिना कारण ओ0टी0पी0 नहीं भेजती। सरकार को जागरूकता अभियान के लिए विशेष विभाग का निर्माण करना चाहिए, जो प्रत्यक्ष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर उदाहरण सहित लोगों को अवगत कराएं। ऐसा करने पर ही लोगों को ऑनलाइन लेन-देन के प्रति भरोसा बना रहेगा। कई घटनाएं ऐसी घटी हैं, जिसमें किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन फ्रॉडिंग होने के बाद से वह इतना ऑनलाइन लेन-देन से घबरा गए हैं, कि जानकारी होने के बाद भी सुविधा का उपयोग नहीं कर रहे और बैंक में लाइन में लगकर कार्य करवा रहे हैं। ऐसे लोगों को भी वापस जोड़ने और भरोसा दिलाना चुनौती होगी।

इस बात से नकारा नहीं जा सकता कि तकनीकी सस्ती हुई है, और यही कारण है कि मोबाइल फोन की उपलब्धता गांवों में भी बढ़ी है। मोबाइल फोन से लेन-देन बहुत आसान हो गया। मोबाइल नेटवर्क की पहुंच भी गांवों तक होने लगी। इंटरनेट ग्राहकों की संख्या में सबसे तेज वृद्धि वाले 10 राज्यों में से 7 का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 2014 और 2018 के बीच संपूर्ण भारत के औसत से कम रहा है। इस काल में अकेले उत्तर प्रदेश में इंटरनेट के ग्राहकों की संख्या में 3.6 करोड़ का इजाफा हुआ है। यह भारत की कुल वृद्धि सील इंटरनेट ग्राहक संख्या का 12 प्रतिशत है। इसी तरह सर्वाधिक ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक सेवा केंद्रों के खुलने में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में 1 जनवरी और 31 अक्टूबर के बीच 6467 अतिरिक्त शहरी और ग्रामीण सीएससी जोड़े गए। ग्राम पंचायत स्तर पर 10339 सक्रिय सीएससी जोड़े गए हैं।

इन तमाम फायदों के बीच ग्रामीणों को एक और फायदा प्रदान करना अनिवार्य है, और वह है उनकी सामाजिक सुरक्षा, क्योंकि ठगी के लिए लोगों की निजी जानकारियां ली जा रही हैं। उनकी जानकारी उन्हीं को बताकर उनके हमदर्द बनने की काशिश ठगी को अंजाम देती है। वर्तमान में बैंक खातों के लिए मोबाइल फोन नम्बर और आधार महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसी व्यवस्था से गरीबों के बैंक खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचायर जाती है। आंकड़ों के अनुसार सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से डीबीटी का उपयोग कर 36 हजार 659 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम लाखों लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जा चुकी है।

ऑनलाइन ठगों की नजर अब डिजिटल लॉकरों पर भी पड़ रही है। जैसे-जैसे डिजिटल लॉकरों की संख्या और उपयोग की बारम्बारता बढ़ेगी, इसमें भी सेंधमारी और ठगी, चोरी शुरू हो जाएगी। डिजिटल लॉकर नागरिकों को अपने विभिन्न प्रकार के दस्तावेजों को एक ही डिजिटल वॉलेट में रखने की सुविधा मुहैया कराता है। इसमें यदि ऐसे दस्तावेज रखे जाने लगे, जो बैंक से संबंधित हैं अथवा पैसे से संबंधित हैं, तो हैकर इसमें भी सेंध लगाने का प्रयास अधिक करने लगेंगे और ऑनलाइन चोरी के खतरे बढ़ने लगेंगे। इसके लिए आवश्यक यह है कि जनता को डिजीटल लॉकर प्रदान करने से पहले उनको उपयोग के लिए टैनिंग दी जाए, इसके बाद ही ऐसी सुविधाएं प्रदान की जाएं।

प्रौद्योगिकी देश की सामाजिक व आर्थिक प्रगति में उत्प्रेरक की भूमिका निभा रही है, लेकिन इसके खतरे भी बढ़ रहे हैं। भारत सरकार जनता के लिए उपयोग ऑनलाइन सुविधाएं तो बढ़ा रही है, लेकिन यह भी जरूरी है कि वह जनता की आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा को भी मजबूत करे। वर्तमान मे जिस प्रकार से ऑनलाइन सेंधमारी बढ़ी है और लगातार लोगों के बैंकों के खातों से पैसे निकाले जा रहे हैं, इस संबंध में भी जनता के लिए सरकार को आगे आकर ऑनलाइन चोरी को भी रोकना होगा। क्योंकि सरकार जब कोई सुविधा प्रदान करने के लिए समर्पित है तो उसी जनता की सुरक्षा के लिए भी पुख्ता इंतेजाम करना किसी दायित्व से कम नहीं होना चाहिए।  

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