सीखने के लिए मैंने हर जख्म सींचे हैं, पढ़ना है दर्द मेरा तो सब लिंक नीचे हैं

शुक्रवार, मई 08, 2020

आखिर कैसे


खेतों में हम रहे, तेरा भरा पेट कैसे ?
मेहनत करी हमने, तू धन्ना सेठ कैसे ?
एक गेहूँ मेरा, एक गेहूँ तेरा
अनाज सबका एक तो फिर दोहरा रेट कैसे ?
खेत जोते, बीज बोया, पानी दिया मैंने
सल मेरी कह रही, तेरी जमीन कैसे ?

 एक जोड़ी कपड़ा पहना, विचार ऊँचा रखा हमने
गर सोच तेरी काली, तो सफ़ेद लिबाज़ कैसे ?
रोका तूने, टोका तूने, दिया नहीं कोई मौका तूने
लेकिन अब जो चल गया, रुकेगा ये आगाज कैसे ?

काम करूं दिन रात, बनती नहीं कोई बात
मेरे पास फटी धोती, तेरे पास कोट कैसे ?
धोखा खाया हर बार, भरोसा किया हर बार
वादा पूरा किया नहीं, तुझे दे दूं वोट कैसे ?

तूने बोला काम कर, आराम को हराम कर
अब चलने की बीमारी है, तो करूं पैर जाम कैसे ?
पढ़ने हमको दिया नहीं, किताब हाथ लिया नहीं
ज्ञान का सूरज तो अब निकला है, फिर अभी शाम कैसे ?

माना ये जमीन तेरी, लेकिन सारी मेहनत मेरी
बाँटने की बारी आई, तेरा पलड़ा नीचा कैसे ?
दया भावना कुछ भी नहीं, दुआ कामना कुछ भी नहीं
दिल इतना छोटा है तो, फिर तू अमीर कैसे ?

 सब कुछ तेरे हाथ में था, हर कोई तेरे साथ में था
जमीर आखिर बेच दिया, होगी नैया पार कैसे ?
उसने बोला आंखे खोल, कब समझेगा सच का मोल
फिर हमने आवाज उठाई, अब गद्दार कैसे ?
  
दिल ने कहा सवाल कर, वापस मेरा माल कर
अभी तो सिर्फ नजरें मिलायीं, तुझमें ये उबाल कैसे ?
मिट्टी से आकार दिया, सपना तेरा साकार किया
अब जब अंदर जा नहीं सकते, तो खुला दरबार कैसे ?


वो बोली अम्मा भात, वो बोली घर पहुंचा दो लगा आघात
अब भी नहीं आये तो, ऐसे भगवान् कैसे ?

-(बृजेन्द्र कुमार वर्मा )





5 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

बहुत अच्छा लिखा है।
गांव की तस्वीर है इसमें

brijendra ने कहा…

शुक्रिया

brijendra ने कहा…

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Journey of our india ने कहा…

badiya kavita.

brijendra ने कहा…

Shukriya