सीखने के लिए मैंने हर जख्म सींचे हैं, पढ़ना है दर्द मेरा तो सब लिंक नीचे हैं
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मंगलवार, अगस्त 20, 2024

तो करता भी क्या

 मुफलिसी में अपनी जुबां दबा कर आया हूँ,

लौटकर आऊंगा नहीं, ये भी बता के आया हूँ 


मैंने मोहब्बत में हारी हैं कई बाजियाँ,

हाल ही में एक डोली उठा कर आया हूँ 


वो रात अलग थी, ये रात अलग,

दंगों में बच्चों का खून बचा कर आया हूँ


अच्छे अच्छों को रोटी तक नसीब नहीं,

मैं तो ईमानदारी मिट्टी में दबा कर आया हूँ.


 वो तो उसकी यादें हैं, तो दिन गुजर भी जाता है,

वरना कई बार खुद की अर्थी सजा कर आया हूँ.


उन्हीं हरामखोरों ने निकाल दिया बाहर,

जिनको सियासत सिखा कर आया हूँ. 


गम ये नहीं, खुद कर लिया बर्बाद 

ख़ुशी ये है, यही कहानी उसे सुना कर आया हूँ. 


घर से न निकलता, तो करता भी क्या 

मैं अपने घर वालों बहुत सता कर आया हूँ. 


गुरुवार, दिसंबर 31, 2020

मैं सच कहूं तो मेरी बुराई करता है


 मैं सच कहूं तो मेरी बुराई करता है 

वो झूठ पे झूठ कहे तो उसकी बातों पे मरता है 


गलतियाँ करे खुद, उसे शर्म नहीं आती 

अपनी गलतियाँ को वो दूसरों पे मढ़ता है 


तेरी तस्वीर देख के खुद को रोक लेता हूँ

जब भी नफरत का जूनून सर पे चढ़ता है 


बड़ा बनने का रास्ता सिर्फ एक होता है 

गलती मान के जो अपना दिल साफ़ करता है 

- बृजेन्द्र कुमार वर्मा 

सदमा

-बृजेन्द्र कुमार वर्मा 

 वो कुछ कर नहीं पाया, तस्वीर दीवार पे लगाए बैठा है,

इश्क ने ऐसा हराया उसे , सदमा दिल पे लगाए बैठा है,

बयाँ करो तो हंस के चले जाते हैं  लोग, 

यही कारण है कि हर दर्द छुपाये बैठा है 

जिन्दगी में आया जो भी, वो धोखा देके जाता रहा 

सुना है अब वो अपनी आस्तीन में छुरा छुपाये बैठा है. 

जानता है, कोई सुन नहीं सकता इस गम के समंदर को 

इसलिए अपनी जुबां पे लगाम लगाए बैठा है 

मैं कैसे कह दूं वो शख्स हरामी है, 

जो अपनी जिन्दगी भी दांव पे लगाए बैठा है 

बिना रिश्वत के वो कुछ कर नहीं सकता 

देख लो अभी तक फाइल दबाये बैठा है. 

-बृजेन्द्र कुमार वर्मा 


शुक्रवार, मई 08, 2020

आखिर कैसे


खेतों में हम रहे, तेरा भरा पेट कैसे ?
मेहनत करी हमने, तू धन्ना सेठ कैसे ?
एक गेहूँ मेरा, एक गेहूँ तेरा
अनाज सबका एक तो फिर दोहरा रेट कैसे ?
खेत जोते, बीज बोया, पानी दिया मैंने
सल मेरी कह रही, तेरी जमीन कैसे ?

 एक जोड़ी कपड़ा पहना, विचार ऊँचा रखा हमने
गर सोच तेरी काली, तो सफ़ेद लिबाज़ कैसे ?
रोका तूने, टोका तूने, दिया नहीं कोई मौका तूने
लेकिन अब जो चल गया, रुकेगा ये आगाज कैसे ?

काम करूं दिन रात, बनती नहीं कोई बात
मेरे पास फटी धोती, तेरे पास कोट कैसे ?
धोखा खाया हर बार, भरोसा किया हर बार
वादा पूरा किया नहीं, तुझे दे दूं वोट कैसे ?

तूने बोला काम कर, आराम को हराम कर
अब चलने की बीमारी है, तो करूं पैर जाम कैसे ?
पढ़ने हमको दिया नहीं, किताब हाथ लिया नहीं
ज्ञान का सूरज तो अब निकला है, फिर अभी शाम कैसे ?

माना ये जमीन तेरी, लेकिन सारी मेहनत मेरी
बाँटने की बारी आई, तेरा पलड़ा नीचा कैसे ?
दया भावना कुछ भी नहीं, दुआ कामना कुछ भी नहीं
दिल इतना छोटा है तो, फिर तू अमीर कैसे ?

 सब कुछ तेरे हाथ में था, हर कोई तेरे साथ में था
जमीर आखिर बेच दिया, होगी नैया पार कैसे ?
उसने बोला आंखे खोल, कब समझेगा सच का मोल
फिर हमने आवाज उठाई, अब गद्दार कैसे ?
  
दिल ने कहा सवाल कर, वापस मेरा माल कर
अभी तो सिर्फ नजरें मिलायीं, तुझमें ये उबाल कैसे ?
मिट्टी से आकार दिया, सपना तेरा साकार किया
अब जब अंदर जा नहीं सकते, तो खुला दरबार कैसे ?


वो बोली अम्मा भात, वो बोली घर पहुंचा दो लगा आघात
अब भी नहीं आये तो, ऐसे भगवान् कैसे ?

-(बृजेन्द्र कुमार वर्मा )





शुक्रवार, मई 01, 2020

फेसबुक पर ऑनलाइन जुड़ाव नया आईडिया नहीं है

कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि ऑनलाइन जुड़ाव नया आईडिया है.
नहीं भाई, फेसबुक पर "उस तरह" के लोग "उस तरह" के लोगों के लिए कई बार और कई साल से ऑनलाइन मीटिंग कर रहे हैं, जिसमें कुछ "उस तरह" के कर्मचारियों को बैठा दिया जाता है और घंटों बात चीत होती रहती है... सवाल जवाब चलते रहते हैं.
हालाँकि ये लोग, राजनीती, विकास, अर्थव्यवस्था आदि पर बात नहीं करते. लेकिन हां ज्ञान जरूर देते हैं.
क्राइम ब्रांच अधिकतर ऐसे लोगों पर नजर रखता है. देश में कई सालों से ह्यूमन ट्रेफिकिंग का सिलसिला जारी है. इन सब को आपस में जोड़ने की कोशिश कीजिये तो पता चल जायेगा. ऑनलाइन कब से और किस बारे में होती आ रही है.

और अंत में
फेसबुक पर ऑनलाइन गेदरिंग नई नहीं है. इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा, की देश में नई से नई तकनिकी का, शुरूआती दौर में गलत वर्ग के लोग ही उपयोग करने लगते हैं, सही उपयोग तो दैर में शुरू होता है .
तभी तो कहावत बनी है, देर आये दुरुस्त आये. 

मंगलवार, अप्रैल 28, 2020

सोशल मीडिया पर सवाल उठाना कितना सही ?

जो छात्र छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं या कर चुके हैं, शिक्षक बनना चाहते हैं या बन चुके हैं, वे हो सके तो अपना अध्ययन शेयर करें, उन्होंने क्या विशेष सीखा जो वे समाज को देना चाहते हैं. 

अभी तमाम लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं, ऐसे में ज्ञानार्जन कर रहे विद्यार्थी अपनी कोई विशेष योगता शेयर कर लोगों को ज्ञान विज्ञान आदि की जानकारी दे सकते हैं. समाज के आधी जनता भी चाहे तो सोशल मीडिया का उच्चतम उपयोग किया जा सकता है. सिर्फ ये कह देना की सोशल मीडिया जहर फैला रहा है... फलां फलां कर रहा है, इससे कुछ नहीं होगा. 

सोशल मेदिय अभी कोरे कागज की तरह होता है. आप उस पर कुछ भी शेयर कर सकते हैं. जैसे एक कलाकार, केनवास पर कुछ भी चित्र उकेर सकता है, जैसे कुम्हार मिट्टी से कोई भी बर्तन बना सकता है, ऐसे भी सोशल मिडिया का उपयोग उपयोगकर्ता कैसे भी कर सकता है... ज्ञान वर्धक जानकारी देकर या फिर जहरीली बातें शेयर करके.... आप माध्यम को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते... माध्यम को उपयोग करने वालो पर सवाल जरूर उठा सकते हैं.

जैसे, युद्ध में बन्दूक से दुश्मन को मारे तो सही लेकिन उसी बन्दूक से किसी अन्य को मार दें तो इसमें बन्दूक पर सवाल नहीं उठा सकते. वह तो सिर्फ एक उपकरण है. बिलकुल इसी तरह से आप सोशल मीडिया पर सवाल नहीं उठा सकते क्योंकि ये एक माध्यम है लोगो से, समूह से जुड़ने का. अब चाहे इसका सही उपयोग किया जाए या गलत.